हम – शराब से मिलना हुआ इस कदर
कि जाम अश्क बनकर बहता चला गया
लगाया जब उन्होंने दिल से हमें
बेरंग होकर भी मै रंगता चला गया।।
नज़रों की रूमानियत से निहारा इस कदर
कि रूह फिर से उनकी होती चली गयी
कातिल बनाया जब उन्होने हमे
साँस उनसे लिपटकर फिर बुन गयी।।
उलझा हुआ था ज़िन्दगी में इस कदर
कि जुबाँ-ए – दर्द बनता चला गया
इश्क़बाज बनाया उन्होने हमें
आलम – ए – हालात संवरता चला गया।।
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